फौजी का बेटा

आजाद अपने कुछ साथियों के साथ स्कूल से लौट रहा था .उसे घर जाने की जल्दी थी क्यों कि उसकी माँ


बीमार थी
.
    वह सुबह स्कूल नहीं आना चाहता था पर मम्मी ने उसे जबरन भेज दिया . बेटा अपनी पढ़ाई में ढ़ील मत दो.मैं ठीक हूँ फिर भी तू मोबाइल ले जा, कोई परेशानी हुई तो तुझे फोन कर दूँगी
  पर मम्मी स्कूल में मोबाइल ले जाने की इजाजत नहीं है …. यदि किसी ने देख लिया तो ड़ांट तो पड़ेगी ही, जुर्माना भी देना पड़ेगा …. फिर भी मैं ले जाता हूँ, साइलेंट मोड में वाइब्रोशन के साथ रख लेता हूँ.जरूरी हो तो आप कर लेना वरना मैं खाने की छुट्टी में आप से बात कर लूँगा.
   हाँ बेटा, यह ठीक रहेगा.
  आजाद ने दोपहर में मम्मी से बात कर ली थी. शाम
को स्कूल से लौटते समय उसे मम्मी के लिए कुछ फल ले जाने थे .वह फलों की
तलाश में इधर उधर नजर घुमा रहा था तभी उसकी नजर भीड़ भरे इलाके में स्थित
एक कचरा कुंडी पर पड़ी.एक आदमी उस में कुछ डाल कर गया था
, पर उसके हाव भाव देख कर आजाद को लगा कि कुछ दाल में काला है. उसने अपने आसपास चलते हुए कुछ बच्चों का ध्यान उधर खींचना चाहा पर वह कान में ईयरफोन लगाए गाने सुनने में व्यस्त थे.
  उसे लगा कि समय अच्छा नहीं है.लोगों को आँख कान खुले रख कर चौकन्ना रहने की जरूरत है …. एक लड़के के कान से ईयरफोन निकाल कर उसने कहा अभी मैं ने एक आदमी को उस कचरा कुंडी में कुछ डाल कर जाते देखा है मुझे शक है कि वह बम भी हो सकता है.
  बच्चे ने बड़ी लापरवाही और बेरुखी से उसे घूर कर देखा और कहा कचरे के डिब्बे में कोई कचरा ही डालेगा न और अपने कान पर दुबारा ईयरफोन लगाते हुए उस से आगे निकल गया.
  तभी आजाद को वह आदमी अपनी तरफ आते हुए दिखा.एक पेड़ की आड़ में खड़े हो कर आजाद ने मोबाइल से उसका फोटो भी लेने का प्रयास किया. अब आजाद दुविधा में था कि क्या करूँ? पुलिस को बताया जाए या नहीं. यदि
वहाँ कुछ नहीं मिला तो वे समझेंगे कि मैं ने उन्हें बिना बात गुमराह कर के
उनका समय बर्बाद किया है .कुछ पुलिस वाले तो इतने बद्दिमाग होते हैं कि
गलत सूचना पर उसे चोट भी पंहुचा सकते हैं
.
  आखिर उसने अपनी दुविधा पर विजय पाली .100 नं.पर फोन मिला कर उसने अपना नाम, अपने स्कूल का नाम व जगह बता कर अपना शक जाहिर करते हुए कहा कि मैं नहीं जानता कि मेरा शक सही है या गलत .हो सकता है वहाँ कुछ भी न मिले …. आप चाहें तो जगह की जाँच कर सकते हैं?
   ठीक है बेटा, जब तुमने अपनी पूरी पहचान बता कर फोन किया है तो हम तुम्हें झूठी अफवाह फैलाने वाला तो नहीं मान सकते …. हम वहाँ जा कर देखेंगे.
  सर अब मै अपने घर जा रहा हूँ मेरी माँ बीमार है.मेरा मोबाइल नंबर आपके पास रिकार्ड हो गया होगा.मेरी किसी मदद की जरूरत हो तो आप मुझे फोन कर सकते हैं.
   ओ के बेटा.
  एक घन्टे बाद पुलिस का फोन आया आजाद तुम्हारा शक सही निकला .वहाँ एक जीवित बम पाया गया
है.वह यदि फट जाता तो बहुत सी जाने जा सकती थीं .हम तुम से मिलना चाहते हैं तुम से उसका हुलिया जान कर हमारे एक्सपर्ट गुनहगार का चित्र बनाएँगे ताकि उसे पकड़ा जा सके.
   सर मैं ने मोबाइल से उसका फोटो लिया था, हो सकता है आप को उस से कुछ मदद मिल सके.
  ओ वेरी गुड, यह तुमने बहुत अच्छा किया, तुम मोबाइल के साथ आ जाओ.
 

पवित्रा अग्रवाल 


आजाद ने अपनी मम्मी को विस्तार से पूरी घटना बताई.सुन कर मम्मी बहुत खुश हुई और बोलीं–
शाबाश बेटा, मुझे तुम पर नाज है.फौजी पापा के बहादुर बेटे हो तुम …. सुन कर पापा बहुत खुश होंगे.
  थोड़ी देर बाद मम्मी ने टी. वी. चालू किया तो समाचार आ रहा था एक बच्चे की मदद से एक बहुत बड़ा
हादसा होते होते बचा.उसने पुलिस को बम रखे होने का शक जाहिर किया था जो सही निकला. उस साहसी बच्चें से अभी मीडिया का संपर्क नहीं हो पाया है ….. अभी अभी खबर आई है कि दो जगह और भी बम विस्फोट हुए हैं.ताजा जानकारी के साथ हम फिर हाजिर होंगे.





यह रचना पवित्रा अग्रवाल जी द्वारा लिखी गयी हैआपकी रचनाएं नीहारिकासाप्ताहिक हिन्दुस्तानधर्मयुगकादम्बिनीउत्तरप्रदेशसरितागृहशोभामनोरमाआदि में प्रकाशित हो चुकी हैं .कुछ रचनाओं का तेलगूपंजाबीमराठी में अनुवाद भी हुआ हैपहला कदम‘(कहानी संग्रह) 1997 ,”उजाले दूर नहीं‘ (कहानी संग्रह) 2010, फूलों से प्यार‘ (बाल कहानी संग्रह) 2012, चिड़िया मैं बन जाऊं (बाल कहानी संग्रह) 2014 आदि पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैंआपकी रचनाओं को विभिन्न पुरस्कारों से नवाजा भी गया है जिनमे यमुना बाई हिन्दी लेखक पुरस्कार  2000 में, साहित्य गरिमा पुरस्कार’ 1998 में2014 में तुलसी साहित्य सम्मान” (भोपाल) आदि प्रमुख है
सम्पर्क सूत्र  घरोंदा4-7-126इसामियां बाजार हैदराबाद -500027 ईमेल  agarwalpavitra78@gmail.com मोबाइल  09393385447




You May Also Like