बेड़ी बंधी कोख से कृष्ण का जन्म होता

बेड़ी बंधी कोख से कृष्ण का जन्म होता

लोग कहते हैं नाम में क्या रक्खा होता है
हम कहते नाम में बहुत कुछ रक्खा होता!

नाम दशरथ है तो राम की याद आती है,
धृतराष्ट्र में तो हमें दुर्योधन ही दिखता है!

कृष्ण का जन्म

पिता पहचान होता है जीव-जंतु जगत का,
योग्य पिता से ही मिलती है हमें मनुष्यता!

माता भूमि होती, पुत्र हैं हम सब पृथ्वी का,
माता की उर्वरा पर निर्भर है पुत्र की उर्वरता,

माता-पिता के संघर्ष में ही पुत्र का उत्कर्ष है,
बेड़ी बंधी कोख से ही कृष्ण का जन्म होता!

बोता है जब हर पति संतति के साथ खुद को,
सुभद्रा की कोख से तब नवअर्जुन जन्म लेता!

यह कोई संयोग नहीं है अनायास हो जाने का,
सभी जीव अपने माता-पिता का हु-ब-हू होता!

हमेशा से नकारते रहे हैं विश्वभर के वैज्ञानिक,
संसार को चलाने वाला कोई ईश्वर नहीं होता!

फिर क्यों नहीं खेतों में उपजाया जाता मानव
अनाज क्यों नहीं पेट के अंदर उपजाया जाता ?



– विनय कुमार विनायक 

दुमका, झारखंड-814101.

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