रोटियाँ विदेशी कहानी वी. दिमित्रिएव

रोटियाँ विदेशी कहानी वी. दिमित्रिएव

रोटियाँ विदेशी कहानी वी. दिमित्रिएव नूतन गुंजन Rotiyaan Explanation Gunjan Hindi Pathmala 8 Question Answer of Rotiyan Russian Story V. Dmitriy

रोटियाँ विदेशी कहानी वी. दिमित्रिएव पाठ का सारांश 

प्रस्तुत पाठ  रोटियाँ , लेखक वी. दिमित्रिएव जी के द्वारा लिखित है। इस रूस कहानी में एक बच्चे का उसके माँ के प्रति प्रेम दिखाया गया है । बच्चा अपने माँ को गरम रोटियाँ खिलाने के लिए बरफ के तूफान की परवाह ना करते हुए स्कूल से घर की ओर चल पड़ता है और रास्ते में तूफान में फंसकर बर्फ में दब जाता है। बात उस समय की है जब सर्दियों के दिन में स्कूल की मैट्रन अन्ना ने स्कूल में दावत दी थी। स्कूल में मेहमान आये थे और स्कूल का एक गरीब बच्चा माल्यूइश एक दिन पहले ही दावत की तैयारियों लिए मेट्रन के पास आ चुका था। यहाँ गरम और ताजी रोटियों की दावत थी माल्यूइश ने रोटियाँ बनती देखी तो उसे अपनी माँ की याद आ गया। उसकी माँ ने बहुत दिनों से गर्म रोटियाँ नहीं खायी थी, लेकिन उसे गर्म रोटियाँ बहुत पसंद थी। दावत शुरू हुई , माल्यूइश अपने-आप को रोक नहीं पाया रोटियाँ खत्म ना हो जाये ये सोचकर उसने पहले से ही अपने मेट्रन से पूछ लिया कि क्या मैं अपनी माँ के लिए कुछ गरम रोटियाँ ले जा सकता हूँ या नहीं। अन्ना ने भी ख़ुशी से हाँ कह दिया। लेकिन पहले तुम खा लो फिर ले जाना कहते हुए मेट्रन वहाँ से चली गई। 

रोटियाँ विदेशी कहानी वी. दिमित्रिएव
रोटियाँ

जैसे ही दावत खत्म हुआ माल्यूइश घर जाने के लिए तैयार हो गया। तभी अन्ना ने बाहर देखा कि मौसम बहुत खराब है अचानक बरफ गिरने लगी है ।चारों ओर अँधेरा छा गया था, जैसे रात उतर आई हो लेकिन अभी रात होने में काफी समय बाकी था। ख़राब मौसम देख अन्ना को चिंता हुई | उसने बच्चे से कहा तुम इतने खराब मौसम में घर कैसे जाओगे। माल्यूइश ने बाहर देखा तो निराश हो गया लेकिन उसे जैसे ही माँ तक गरम रोटियाँ पहुँचाने की बात याद आयी वो उत्साहित होकर बोला आप मौसम की चिंता ना करें मेरे पांव घर का रास्ता अच्छी तरह पहचानते हैं। अन्ना उसके मन की बात समझ गई इसिलए उसने ज्यादा विरोध नहीं किया, उसे जाने की अनुमति दे दी | उससे पहले उसे अच्छे से गरम कपड़े पहना दिये सिर पर भी ऊनी रुमाल बाँध दिया और कुछ गरम-गरम रोटियाँ माँ के लिए दे-दी। माल्यूइश मेट्रन से विदा लेकर चला तो उसके साथ एक कुत्ता ब्लैकी भी गया उन दोनों में अच्छी दोस्ती थी। अन्ना उन्हें छोड़ने दरवाजे तक आई तो महसूस किया कि मौसम लगातार खराब होते जा रहा है। बर्फ और कोहरे ने रौशनी को पूरी तरह ढक लिया है । बरफ के ग़ुबार तेज हवा में सरसराते उड़ रहे थे। धुंध बनने के कारण दो-तीन हाथ के दूरी पर भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। उसने माल्यूइश को रोकना चाहा लेकिन चुप रह गई। 

वह वापस आ कर क़िताब पढ़ने लगी लेकिन अब मौसम बर्फानी तूफान का रूप ले चुकी थी |  अन्ना की बेचैनी बढ़ने लगी। अचानक उन्होंने कुछ सोचा और गरम कपड़े पहनकर गली में आ गई अकेले जाने की हिम्मत नहीं हुई तो उसने पड़ोस के एक लड़के इवान को साथ ले लिया। चारों तरफ बर्फ से ढंकी कोहरे का अंधेरा था | इवान छड़ी से रास्ता टटोलते हुए आगे चल रहा था और अन्ना पीछे आ रही थी। काफी देर और कठिनाई के बाद वे माल्यूइश के घर पहुँचे जो कि ज्यादा दूर भी नहीं था। उन्होंने दरवाजा खटखटाया, माल्यूइश की माँ फिडोसिया ने दरवाजा खोला अन्ना के साथ दूसरे लड़के को देख वह चकित रह गई। अन्ना ने अंदर निगाह दौड़ाया और पूछा कि माल्यूइश कहाँ है। यह सुनकर फिडोसिया घबरा गई । अन्ना भी आश्चर्य चकित हो गई। फिडोसिया का मन घबराने लगा कि कुछ बुरा न हो जाये बच्चे भी डरने लगे। इवान ने सारे पड़ोसियों को इक्कठा किया और माल्यूइश को जल्दी ढूढ़ने को कहा | सब सोच ही रहे थे कि उसे कैसे ढूंढा जाए तभी एक लड़का दौड़ते हुए आया दौड़कर आए हुए लड़के ने कहा कि छोटी पहाड़ी के पीछे गोदाम के पास एक कुत्ता लगातार भौंके जा रहा है। मैं वहीं से आ रहा हूँ ऐसे मौसम में जबकि अन्य सभी जानवर कहीं-न-कहीं दुबके छिपे बैठे होंगे, उस समय कुत्ते का भौंकना मुझे आश्चर्यजनक लगा। मुझे लगा कि वह मुझसे कुछ कहना चाह रहा था। इस पर सभी ने कुत्ते की आवाज की तरफ चल पड़े, सारे लोग हाथ में कुदाल, फावड़े और कंदील उठाए ब्लैकी की ओर बढ़ रहे थे क्योंकि अन्ना जानती थी माल्यूइश के साथ ब्लैकी भी आया था।  सभी लोग ब्लैकी की आवाज को खोजते हुए उसके पास पहुँच गए | ब्लैकी अन्ना को देखकर उससे लिपट गया अन्ना ने उसे प्यार से सहलाया तो  ब्लैकी में जान आ गई वह एक जगह पर पंजो से खोदने लगा भी ने उसे देखकर उस जगह को खोदना शुरू किया तो माल्यूइश दिखने लगा। उसकी माँ उसे देखते ही रोने लगी अन्ना ने उसके नब्ज देखे वह चल रही थी अन्ना के चेहरे पर राहत आयी। लेकिन भयंकर शर्दी की वजह से वो बेहोश हो चुका था। उसे फिडोसिया की झोपड़ी में लाकर उसके पास आग जलाकर उसकी  मालिश की गई। कुछ देर बाद माल्यूइश को होश आ गया। वह आश्चर्य में था कि यहाँ इतने सारे लोग क्यों है | उसकी माँ रो रही थी वह उठ गया और अपनी माँ के आँसू पोछते हुए बोला रो मत माँ ! देख मैं तेरे लिए अपने मैट्रन के घर से गरम-गरम रोटियाँ लाया हूँ। 

माँ ने कसकर माल्यूइश को अपने सीने से लगा लिया और रोने लगी। अन्ना ने उसके सिर पर हाथ फेरा और बहुत मुश्किल से अपने आँसू रोके । वहाँ उपस्थित सभी लोगों का यही हाल था। माल्यूइश अपनी माँ को इतने कठिनाई में भी रोटियाँ ला कर दिया। यह प्रेम भाव विभोर कर देने वाली दिल की गहराई को झकझोर देने वाली कहानी है। माँ-बेटे के बीच के अटूट प्रेम को दर्शाती माँ-बेटे की अनुपम गाथा है…|| 

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रोटियाँ विदेशी कहानी वी. दिमित्रिएव पाठ के प्रश्न उत्तर 

प्रश्न-1 माल्यूइश अपनी मेट्रन के पास एक दिन पहले ही क्यों पहुँच गया था ? 

उत्तर- माल्यूइश दावत की तैयारीयों में हाथ बँटाने के लिए एक दिन पहले ही अपनी मेट्रन के पास पहुँच गया था | 

प्रश्न-2 इवान और अन्ना को माल्यूइश के घर पहुँचने में देर क्यों लगी ? 

उत्तर- खराब मौसम और धुंध से भरे खराब रास्ते के कारण इवान और अन्ना को माल्यूइश के घर पहुँचने में देर लगी | 

प्रश्न-3 दौड़कर आए हुए लड़के ने क्या सूचना दी ? 

उत्तर- दौड़कर आए हुए लड़के ने कहा कि छोटी पहाड़ी के पीछे गोदाम के पास एक कुत्ता लगातार भौंके जा रहा है। मैं वहीं से आ रहा हूँ ऐसे मौसम में जबकि अन्य सभी जानवर कहीं-न-कहीं दुबके छिपे बैठे होंगे, उस समय कुत्ते का भौंकना मुझे आश्चर्यजनक लगा। मुझे लगा कि वह मुझसे कुछ कहना चाह रहा था | 

प्रश्न-4 अन्ना के चेहरे पर उत्साह की तरंग दौड़ने का क्या कारण था ? 

उत्तर- माल्यूइश के साथ आए कुत्ते ब्लैकी की आवाज पहचानते ही अन्ना के चेहरे पर उत्साह की तरंग दौड़ गई कि वह भी कहीं आस-पास ही होगा | 

प्रश्न-5 गरम रोटियाँ बनती देख माल्यूइश को क्या ख्याल आया ? 

उत्तर- गरम रोटियाँ बनती देख माल्यूइश को अपनी माँ का ख्याल आया । उसकी माँ ने बहुत दिनों से गर्म रोटियाँ नहीं खायी थी, उसे गर्म रोटियाँ बहुत पसंद थी | 

प्रश्न-6 माल्यूइश को दरवाजे तक छोड़ते समय अन्ना मिखाइलोवना ने क्या महसूस किया ? 

उत्तर- अन्ना मिखाइलोवना ने महसूस किया की मौसम लगातार खराब होते जा रहा है। बर्फ और कोहरे ने रौशनी को पूरी तरह ढक लिया है । बरफ के ग़ुबार तेज हवा में सरसराते उड़ रहे थे। धुंध बनने के कारण दो-तीन हाथ के दूरी पर भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा है | 

प्रश्न-7 अन्ना की बेचैनी क्यों बढ़ रही थी ?

उत्तर- मौसम लगातार खराब होते जा रहा था। बर्फ और कोहरे ने रौशनी को पूरी तरह ढक लिया था। धुंध बनने के कारण दो-तीन हाथ के दूरी पर भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा था और माल्यूइश अभी तक घर नहीं पहुँचा था। यह सुनकर अन्ना की बेचैनी बढ़ रही थी। 

प्रश्न-8 ब्लैकी ने माल्यूइश का पता कैसे बताया ? 

उत्तर- ब्लैकी ने बर्फ के एक ढेर को तेजी से खोदकर माल्यूइश का पता बताया | 

प्रश्न-9 बर्फ के ढेर के नीचे दबे माल्यूइश को देखकर अन्ना ने क्या किया ? 

उत्तर- बर्फ के ढेर के नीचे दबे माल्यूइश को देखकर अन्ना ने उसके नब्ज देखे, फिर उसे फिडोसिया की झोपड़ी में लाकर उसके पास तेज आग जलाई और उसके शरीर पर अच्छी तरह से मालिश किया | 

प्रश्न-10 सही उत्तर पर निशान √ लगाइये — 

क.मौसम खराब होता देखकर अन्ना को क्या चिंता हुई ? 

उत्तर- (√ ) खराब मौसम में माल्यूइश घर कैसे जाएगा | 

ख. अन्ना ने माल्यूइश के घर जाते समय इवान को साथ क्यों ले लिया ? 

उत्तर- (√) उनकी अकेले जाने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी | 

ग. दरवाजा खोलने पर माल्यूइश की माँ चकित क्यों रह गई ? 

उत्तर- (√) अन्ना के साथ माल्यूइश के स्थान पर किसी और को देखकर | 

घ.माल्यूइश के छोटे भाई-बहनों की आँखों में आँसू क्यों भर आए

उत्तर- (√) अपनी माँ को रोता देखकर | 

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प्रश्न-11 दिए गए उपसर्ग और प्रत्ययों से नए शब्द बनाइए —

उत्तर – निम्नलिखित उत्तर है – 

• बे + चैन – बेचैन , बेशूमार , बेकाबू
• उप + स्थित – उपस्थित, उपवन, उपमान
• अन् + इष्ट – अनिष्ट, अंनत, अनुदार 
• उत्साह + इत – उत्साहित, अपमानित, वर्णित 

प्रश्न-12 सर्वनाम छः प्रकार के होते हैं — 

पुरुषवाचक – (मैं, तुम, वे)
निश्चयवाचक – (यह’ वह)
अनिश्चयवाचक – (कोई, कुछ, किसी)
प्रश्नवाचक – (कौन, क्या)
निजवाचक – (स्वयं, खुद, अपने-आप)
संम्बंध वाचक – (जो-सो, जैसा-वैसा)

• इन वाक्यों में सर्वनाम रेखांकित करके उनके भेद लिखिए — 

i.  बरफ के नीचे कुछ दिखाई दिया । 

उत्तर – अनिश्चयवाचक

ii. माल्यूइश के साथ कोई था।

उत्तर- अनिश्चयवाचक

iii.  लेकिन पहले तुम तो खा लो।

उत्तर- पुरुषवाचक

iv.  माल्यूइश अपने-आप चला जायेगा।

उत्तर- निजवाचक

v.  यह तो ब्लैकी की ही आवाज है।

उत्तर- निश्चयवाचक

vi.  जो मेहनत करेगा उसे सफलता मिलेगा।

उत्तर- संम्बंध वाचक

प्रश्न-13 थपथपाना, सरसराना, खटखटाना शब्द ध्वनियों को प्रकट कर रहे हैं । ऐसे शब्दों को ध्वन्यात्मक शब्द कहते हैं | 

• आप भी छह ध्वन्यात्मक शब्द लिखिए — 

उत्तर- निम्नलिखित उत्तर है – 

• गुनगुनाना
• लपलपाना
• लहलहाना
• गड़गड़ाना 
• खनखनाना
• ठकठकाना

प्रश्न-14 उचित शब्द लिखकर वाक्य पूरे कीजिए — 

हाय!     ओह!     अरे!     वाह!      शाबास!

उत्तर- निम्नलिखित उत्तर है –  

• वाह ! गरम-गरम रोटियाँ ।
• ओह! माल्यूइश बाहर तो बहुत बरफ गिर रही है।
• हाय! माल्यूइश कहाँ होगा ? कैसा होगा ?
• अरे! यह तो ब्लैकी की आवाज है।
• शाबास ! तुमने बहुत अच्छा काम किया है।

प्रश्न-15 दिए गए मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए — 

त्तर- निम्नलिखित उत्तर है – 

• कलेजा मुँह को आना – बेटे को तकलीफ में देखकर माँ का कलेजा मुँह को आ गया। 
• हर्ष की लहर दौड़ जाना – बेटा दसवीं में अच्छे अंक से पास हो गया तो घर में हर्ष की लहर दौड़ गई।
• फ़टी-फ़टी आँखों से देखना – सात वर्ष बाद विदेश से लौटे बेटे को माँ फटी-फ़टी आँखों से देखने लगी। 
• हाथ-बँटाना – सामाजिक कार्यों में सबको हाथ-बँटाना चाहिए।

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रोटियाँ विदेशी कहानी वी. दिमित्रिएव पाठ से संबंधित शब्दार्थ 

• मेट्रन – हॉस्टल में देखभाल करने वाली महिला
हाथ-बँटाने – मदद करना
अनमने – उदास, खिन्न
गुबार – मैल, धूल, गर्द
ओझल – छिपा हुआ
थपेड़े  – चपत, धक्का
कलेजा मुँह में आ गया – किसी परेशानी से व्याकुल होना
साँप सूँघ गया –  आश्चर्य से देखना
अनिष्ट – बुरा
आशंका  – कुछ होने का भय
वायरलैस – एक यंत्र
तरंग – लहर
कंदील – एक तरह की लालटेन
मार्गदर्शन – रास्ता दिखाना
मूर्छित – बेहोश   | 

                                

© मनव्वर अशरफ़ी 

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