Farsh Par Poem Class 8 Hindi Durva

फर्श पर निर्मला गर्ग

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फर्श पर कविता की व्याख्या भावार्थ

चिड़िया आती है
डाल जाती तिनके फ़र्श पर
हवा आती है
बिखेर जाती धूल फ़र्श पर
सूरज आता है
सजा जाता चिंदियाँ फ़र्श पर
मुन्ना आता है
उलट देता कटोरी फ़र्श पर

भावार्थ – प्रस्तुत पंक्तियाँ फर्श पर कविता से लिया गया है | यह कविता कवयित्री निर्मला गर्ग जी के द्वारा लिखित है। इन पंक्तियों के माध्यम से निर्मला जी हमारे घर के फर्श की महत्व को बताती हैं। वे कहती हैं कि फ़र्श हमारे रोज की दिनचर्या का हिस्सा है। निर्मला जी बताती हैं कि चिड़िया आती है और तिनके फर्श पर डाल कर चली जाती है। जब भी हवा चलती है तो वो अपने साथ धूल को भी फर्श में बिखेर जाती है। सूरज अपनी किरणों से रंगीन कागज सी चिंदियाँ फर्श पर सजा देता है। घर का छोटा बच्चा मुन्ना भी फर्श में खेलता है और कटोरी उलट कर भाग जाता। निर्मला जी कहती हैं कि फर्श में ही हमारा पूरा जीवन बीत जाता है। 

फर्श पर निर्मला गर्ग
फर्श पर निर्मला गर्ग

मम्मी आती है
बीनती दाल-चावल फर्श पर
पापा आते हैं
उतार देते जूते फर्श पर
महरी आती है
समेट लेती है सब कुछ
अपने बिवाई पड़े हाथों में
और इस तरह लिखती है हर रोज
एक कविता फर्श पर

भावार्थ – प्रस्तुत पंक्तियाँ फर्श पर कविता से लिया गया है | यह कविता कवयित्री निर्मला गर्ग जी के द्वारा लिखित है। इन पंक्तियों के माध्यम से निर्मला जी हमारे घर के फर्श की महत्व को बताती हैं। फर्श हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा होता है | हमारे सुख-दुःख में भी फर्श का विशेष महत्व है | निर्मला जी कहती हैं कि हमारी मम्मी फर्श पर आराम से बैठकर दाल-चावल सब साफ कर लेती है। पापा जब काम से थके हारे आते हैं तो फर्श पर जूते उतार कर बैठ जाते हैं। जब काम करने वाली सफाई करने आती है तो अपने कटे-फ़टे हाथों से सब समेट कर साफ करती है। इस तरह से हर रोज वह फर्श पर एक नई कविता लिख जाती है। फर्श फिर से निर्मल, स्वच्छ हो जाती है | 

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फर्श पर कविता का सारांश Farsh Par Poem Summary


प्रस्तुत पाठ फर्श पर कवयित्री निर्मला गर्ग जी के द्वारा रचित है। इस कविता में निर्मला जी ने हमारे घर की फर्श की महत्व को बताया है। क्योंकि हमारे जीवन के सूख-दुःख की घड़ी इसी फर्श पर गुजरती है। चिड़िया तिनके डाल जाती है। हवा अपने साथ धूल भी बिखेर देता है मुन्ना भी गन्दगी करता है। मम्मी चावल दाल चुनती है। पापा जूते भी यहीं रख देते हैं, लेकिन कामवाली रोज आकर फर्श को साफ करती है सारी गंदगी भी समेट देती है। इस तरह से एक काम करने वाली बाई की भी महत्ता को निर्मला जी ने कविता के माध्यम से बताने का प्रयास किया है। जो हर रोज उसे साफ करती है और नए दिन की खुशहाली भी देती है…|| 


फर्श पर कविता के प्रश्न उत्तर Farsh Par Poem Question Answers

प्रश्न-1 कविता में फ़र्श पर कौन-कौन और क्या-क्या करते हैं ? 

उत्तर- प्रस्तुत कविता के अनुसार, फ़र्श पर चिड़िया तिनके लाकर डाल देती है। हवा धूल बिखेर देती है। सूरज धूप बिखेरता है। मुन्ना कटोरी उलट देता है। मम्मी दाल-चावल चुनती है और पापा जूते लाकर उतार देते हैं | 

प्रश्न-2  फ़र्श पर सभी के द्वारा कुछ न कुछ काम करने की बात कविता में हुई है, मगर महरी के काम को ही कविता लिखना क्यों कहा गया है ? 

उत्तर- महरी के काम को ही कविता लिखना इसलिए कहा गया है क्योंकि वह झाड़ू लगाती फर्श के सारे गंदगी को समेट कर साफ करती है, फिर फर्श को पोछा लगाती है, पोछा लगाते ही फर्श नए जैसे दिखने लगता है, जिसे कविता लिखना कहा गया है | 

प्रश्न-3 कविता में बहुत से कामों का ज़िक्र किया गया है; जैसे –बीनना, बिखेरना, सजाना, उतारना, समेटना आदि। इन्हें क्रियाएँ कहते हैं। नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं। इन्हें उचित क्रिया के साथ लिखो — 

पानी, टोकरी, बस्ता, चावल, हथेली, रंग, जूते

…………………..बीनना
…………………..उतारना
………………बिखेरना
…………………..समेटना
…………………..सजाना

उत्तर- उचित क्रिया के साथ लिखो – 

• चावल बीनना 
• जूते उतारना
• पानी, रंग बिखेरना 
• बस्ता समेटना 
• हथेली, टोकरी सजाना

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फर्श पर कविता से संबंधित शब्दार्थ 

• चिंदियाँ – छोटे-छोटे टुकड़े, धूप के छोटे-छोटे चकते
• बीनना – चुनना
• महरी – काम करने वाली घरेलू सहायिका
• बिवाई – हाथ-पैर के चमड़ों का फटना | 



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