महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र-Queen Victoria’s manifesto

कम्पनी से क्राउन के हाथों में सत्ता के हस्तान्तरण के बाद महारानी विक्टोरिया ने 1 नवम्बर 1858 ई. को शाही घोषणा एक घोषणा-पत्र के माध्यम से की। इस घोषणा पत्र की शब्द रचना बहुत सावधानी के साथ विचार करने के बाद की गई थी। इसकी भाषा बड़ी सुन्दर तथा प्रतिष्ठापूर्ण थी और उससे मित्रता, उदारता, दयालुता, सहृदयता, क्षमा और न्याय की भावना आभास होता था।

 

इस घोषणा पत्र में अनेक प्रतिज्ञाओं और आश्वासनों का समावेश किया गया था। महारानी विक्टोरिया के इस घोषणा पत्र को लार्ड केनिंग ने 1 नवम्बर 1858 को इलाहाबाद में पढ़कर सुनाया। इस घोषणा पत्र में महारानी ने कहा था कि हमने उस समस्त भारतीय प्रदेशों को अपने अधिकार में ले लेने का निर्णय कर लिया है जो इससे पूर्व कम्पनी के पास थे और जिन पर वह हमारी ओर से राज्य कर रही थी।

महारानी विक्टोरिया के घोषणा पत्र की प्रमुख घोषणाएं

हम इन प्रदेशों में रहने वाली प्रजा से अपने तथा अपने वारिसों या उत्तराधिकारियों के प्रति राजभक्ति की आशा करते हैं।

हम लार्ड केनिंग को अपने भारतीय प्रदेशों का प्रथम वायसराय तथा गवर्नर जनरल नियुक्त करते हैं।

हम उन समस्त सन्धियों को जो कम्पनी ने भारतीय राजाओं के साथ की है प्रसन्नता से स्वीकारते हैं और उन्हें पूरा करने का विश्वास दिलाते हैं।

हम कम्पनी द्वारा नियुक्त किये गये समस्त सैनिक तथा असैनिक पदाधिकारियों को उनके पदों पर पक्का करते हैं।

हमें अपने भारतीय प्रदेशों को विस्तुत करने की इच्छा नहीं है। हम दूसरों के प्रदेशों या अधिकारों पर न तो स्वयं छापा मारेंगे और न ही किसी शक्ति को अपने प्रदेशों तथा अधिकारों पर छापा मारने की आज्ञा देंगे।

हम अपने अधिकारों, प्रतिष्ठा तथा सम्मान के तुल्य भारतीय नरेशों के अधिकारों, प्रतिष्ठा तथा सम्मान का आदर करेंगे।

हम अपनी प्रजा के किसी भी सदस्य पर अपने धार्मिक विचारों को नहीं थोपेंगे और न ही प्रजा के धार्मिक जीवन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करेंगे।

सब के साथ समान और निष्पक्ष न्याय किया जायेगा।

नौकरियों के सम्बन्ध में भरती का आधार एकमात्र योग्यता होगी, जाति और मत को किसी प्रकार का महत्त्व नहीं दिया जायेगा।

महारानी ने इस घोषणा में विद्रोह की दुःखांत घटनाओं के प्रति खेद व्यक्त किया गया और अंग्रेजों के वध में भाग नहीं लेने वाले सब विद्रोहियों को बिना शर्त क्षमा कर दिया गया। बन्दियों की रिहाई के सम्बन्ध में भी आदेश दिया गया।

अन्त में, महारानी ने अपनी घोषणा में कहा कि जब भगवान् की कृपा से आन्तरिक शान्ति स्थापित हो जायेगी तब हमारी हार्दिक अभिलाषा है कि भारत के शान्तिपूर्ण व्यवसायों को प्रोत्साहन दिया जाये सार्वजनिक उपयोगिता के कार्यों में वृद्धि की जाये और अंग्रेजी प्रदेशों में रहने वाली प्रजा के हितों को दृष्टि में रखकर शासन किया जाये।

भारतीय जनता की समृद्धि में हमारी शक्ति है, उनके संतोष में हमारी सुरक्षा और उनकी कृतज्ञता में हमारा पुरस्कार। ईश्वर हमें और हमारे अधीन काम करने वाले अधिकारियों को शक्ति दे कि हम अपने प्रजानों की भलाई के लिये अपनी इच्छाओं को कार्यन्वित कर सकें।

विक्टोरिया के घोषणा पत्र का महत्व

महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र भारतीय इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यद्यपि इसे क्रियान्वित नहीं किया गया तथापि इसकी सुन्दर भाषा एवं उच्च आवश्वसनों के कारण भारतीयों ने इस घोषणा पत्र का स्वागत किया। इसके अतिरिक्त घोषणा पत्र द्वारा एक ऐसी शासकीय नीति का सूत्रपात किया गया जो आगामी 60 वर्ष तक भारतीय ब्रिटिश शासन का आधार बनी रही।

यह घोषणा पत्र प्राय 60 वर्षो , सन् 1917 ई. तक ब्रिटिश सरकार की भारत सम्बन्धी नीति का मूल आधार बन रहा। उसने उन समस्त सिद्धान्तों को निश्चित किया जिनके अनुसार भारत का शासन प्रबन्ध भविष्य में होने को था।

घोषणा भारतीय जनता के लिए वरदान-सिद्ध हुई। इसने भारतीयों को शान्ति, समृद्धि, स्वतन्त्रता, समान व्यवहार तथा योग्यता के बल पर पद प्रदान करने का वचन दिया। इस घोषणा में भारतीय लोगों के विक्षुब्ध चित्त काफी हद तक शान्त हो गये और उनमें सुख प्राप्त करने की नवीन आशा उत्पन्न हुई।

लार्ड कैनिंग ने इस घोषणा के सम्बन्ध में कहा कि इसके द्वारा भारत में एक नये युग का आरम्भ हुआ है। कुछ लेखक इस घोषणा को भारतीय स्वतन्त्रता का सबसे बड़ा चार्टर मानते हैं।