तालीकोटा का युद्ध-Battle of Talikota

तालीकोटा का युद्ध 25 जनवरी 1565 ई. में हुआ। इस युद्ध का स्थान राक्षसी एवं तांगड़ी गांवों के बीच का क्षेत्र था। इसलिए इसे “राक्षसी-तांगड़ी का युद्ध” भी कहते हैं।

 

यह युद्ध विजयनगर साम्राज्य तथा दक्कन के चार संयुक्त सैनिक संघों के मध्य हुआ। जिसमें संयुक्त संघ विजयी हुआ। संयुक्त सैनिक संघ में गोलकुण्डा, अहमदनगर, बीजापुर तथा बीदर शामिल थे। इस युद्ध के समय विजयनगर का शासक सदाशिव राय था।

तालीकोटा के युद्ध को बन्नी हट्टी के युद्ध के नाम से भी जाना जाता है।

तालीकोटा के युद्ध का कारण

1542 ई. में सदाशिव राय विजयनगर सम्राज्य का शासक बना। इसके समय में शासन की वास्तविक शक्ति रामराय के हाथों में थी। रामराय ने पड़ोसी मुस्लिम राज्यों की आन्तरिक राजनीति में हस्तक्षेप किया तथा उन पर नियन्त्रण स्थापित किया। जिससे वे विरोधी हो गये।

 

दूसरे विजयनगर की बढ़ती हुई शक्ति से मुस्लिम राज्य इतने आशंकित हो गये कि उन्होंने आपसी मतभेदों को भुलाकर एक होने का निश्चय किया। अतः उन्होंने विजयनगर के विरुद्ध एक सैनिक महासंघ का गठन किया।

सैनिक महासंघ

विजयनगर साम्राज्य के विरुद्ध इस सैनिक महासंघ में अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुण्डा व बीदर शामिल थे। गोलकुण्डा व बरार के मध्य पारस्परिक शत्रुता के कारण बरार इस महासंघ में शामिल नहीं हुआ।

इन चार राज्यों ने पारस्परिक वैवाहिक सम्बन्धों द्वारा महासंघ को मजबूती प्रदान की। महासंघ का नेतृत्व बीजापुर का शासक अली आदिलशाह ने किया।

तालीकोटा के युद्ध का प्रारम्भ

बीजापुर के शासक अली आदिलशाह ने विजयनगर से रायचूर, मुद्गल, अदोनी आदि किलों को वापस मांगा। रामराय ने इस मांग को ठुकरा दिया। अतः अली आदिलशाह के नेतृत्व में महासंघ की सेनाएं राक्षसी-तांगड़ी की ओर बढ़ी।

रामराय के नेतृत्व में विजयनगर साम्राज्य की सेना भी वहाँ पहुँची। 25 जनवरी 1565 ई. में दोनों सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ। प्रारम्भिक में महासंघ हारता हुआ प्रतीत हुआ, किन्तु अन्तिम समय में तोपों के प्रयोग द्वारा महासंघ की सेना ने विजयनगर की सेना में तबाही मचा दी। फलस्वरूप युद्ध क्षेत्र में ही सत्तर वर्षीय रामराय मारा गया।

तालीकोटा के युद्ध का परिणाम

महासंघ की सेना विजयी हुई। विजयी सेना ने नगर में प्रवेश कर उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया। सेवेल इस युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी था। तालीकोटा युद्ध के तत्काल बाद विदेशी यात्री सीजर फ्रेडरिक ने विजयनगर की यात्रा की एवं स्थिति का वर्णन किया। तालीकोटा के इस युद्ध की गणना भारतीय इतिहास के विनाशकारी युद्धों में की जाती है।