वन्य जीव संरक्षण या सुरक्षा अधिनियम-1972-Wildlife Protection Act

वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने 1972 में “वन्य जीव संरक्षण अधिनियम” पारित किया। इसका उद्देश्य वन्य जीवों को सुरक्षित कर प्रकृति के संतुलन को बनाये रखना है।

वन्य जीव क्या होते हैं?

प्राकृतिक आवासों में आवासित जीव-जन्तुओं को, जो गैर पालतू हैं, वन्य जीव की श्रेणी में रखा गया है। जिसमें पक्षी, सरीसृप, उभयचर, मत्स्य, मेरुदण्डधारी, बिना मेरुदण्डधारी आदि जीव सम्मिलित हैं।

वन्य जीव संरक्षण के कानून

पारिस्थितिक संतुलन बनाये रखने, मृदा क्षरण रोकने, खाद्य, औषधि, मसालों, पेयों, सुगंधों आदि के स्रोत के रूप में आर्थिक उत्पादों के स्रोत के रूप में तथा उत्तम जातियों के प्रजनन के लिए वन्य जीवन अपरिहार्य है। अतः वन्य जीवों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए समय-समय पर कई नियम तथा कानून पारित किये गये है। जैसे-

मद्रास वाइल्ड एलिफेण्ट प्रीजर्वेशन एक्ट-1873

आल इण्डिया एलिफेण्ट प्रीजर्वेशन एक्ट-1879

वाइल्ड बर्ड प्रोटेक्शन एक्ट-1887

वाइल्ड बर्ड एंड ऐनीमल प्रोटेक्शन एक्ट-1912

बंगाल राइनोसेरस (गैंण्डा) प्रीजर्वेशन एक्ट-1932

असम राइनोसेरस प्रीजर्वेशन एक्ट-1954

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट (संशोधित)-1991

इन सभी अधिनियमों के बनाने व लागू किए जाने का उद्देश्य वन जीवों तथा उनसे सम्बन्धित सभी भौगोलिक क्षेत्रों को सुरक्षित करना है। यह राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और जीव क्षेत्र, तीन प्रकार के क्षेत्र हैं।

राष्ट्रीय उद्यान- वो सुरक्षित क्षेत्र हैं जहां कृषि, चराई और कटाई की मनाही होती है। भारत में लगभग 100 राष्ट्रीय उद्यान हैं।

अभ्यारण्य- वो झीलों वाले और झीलों रहित क्षेत्र हैं, जहां जानवरों का शिकार करना गैर – कानूनी होता है।

जीव क्षेत्र- बहुउद्देशीय सुरक्षा क्षेत्र होते हैं। इनमें वन जीवन, कबीले के लोग, घरेलू पौधे एक साथ रहते हैं।

भारतीय वन्य जीव बोर्ड

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अधीन 1985 में ‘भारतीय वन्य जीव बोर्ड’ की स्थापना की गयी जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधानमन्त्री करते हैं। यह वन्य जीव संरक्षण की अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी और निर्देश देने के लिए शीर्षस्थ सलाहकार एजेंसी है। 1972 के अधिनियम के अधीन प्रत्येक राज्य के लिए एक वन्य जीवन सलाहकार बोर्ड का गठन किया गया है।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के सिद्धांत

राष्ट्रीय उद्यागों और जीव क्षेत्रों के कोर जोन में मानवीय कार्यों का निषेध है।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अधीन, कतिपय जैव भौगोलिक क्षेत्रों का गठन किया गया है। ये क्षेत्र संकटग्रस्त प्रजातियों को प्राकृतिक पर्यावास, संसाधन तथा संरक्षण उपलब्ध कराते हैं तथा जैव-विविधता को सुरक्षित रखते हैं।

वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम वन्य प्राणियों के शिकार तथा उन्हें पकड़ने को निषेध करता है। इसके लिए 25,000 रूपये का आर्थिक दण्ड और पाँच वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है।

वन्य जीव अपराधों के लिये प्रयोग में लाये जाने वाले सभी हथियार, साधन और उपकरण वर्जित होंगे।

किसी अभय वन के 10 किलोमीटर घेरे में हथियारों का लाईसेंस जारी नहीं किया जायेगा।

इसके अन्तर्गत चमड़ी, हड्डियाँ और अन्य वन्य जीव उत्पादों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है।

वन्य जीवों को मानव की सुरक्षा के लिये उतनी देर तक गोली मारने की सख्त मनाही है जब तक नियुक्त अधिकारियों द्वारा उसको मनुष्य के लिये खतरनाक करार देकर उसकी मंजूरी न दी गई हो।

किसी वन्य जीव या उसका कोई अंग या उससे बने किसी सामान को पास में रखना अवैध है।

किसी वन्य जीव का व्यापार या उसके किसी अंग या अंग से निर्मित किसी वस्तु का व्यापार करना अवैध है।

किसी पक्षी के घोसले या उसके बच्चे या किसी जानवर के बच्चे को नष्ट करना या उसकी चोरी करना अवैध है।

किसी संरक्षित वन्य जीव से बने सामान को पास में रखना इस बात को मान्य ठहराता है कि यह उस जीव की हत्या करके प्राप्त किया गया था अतः वह व्यक्ति दण्ड का पात्र हो जाता है। निर्दोषता सिद्ध करने का उत्तरदायित्व दोषारोपित व्यक्ति के ऊपर है।

वन्य जीवों को इकट्ठा रखने को चिड़ियाघर की परिभाषा की परिधि में रखा जायेगा और इस पर केन्द्रीय चिड़िया घर प्राधिकरण द्वारा निर्धारित नियम लागू होंगे।

सरकस वालों को जंगल से किसी वन्य जीव को प्राप्त करने की मनाही है।

वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम शिकार का निषेध करता है।

दवाई युक्त दुर्लभ पौधों का उखाड़ना, उठाना और बेचना मना किया गया है।

वन्य जीव संरक्षण कानून की आवश्यकता

वन्य जीव सम्बन्धी गहन अनुसन्धान की नितान्त आवश्यकता है। जीवों सम्बन्धी सभी सूचनायें एकत्रित कर उनकी समस्याओं का निराकरण करना आवश्यक है।

वन्य जीवों के प्राकृतिक वास क्षेत्रों की सुरक्षा करना।

वर्तमान समय में प्रदूषण के कारण वन्य जन्तुओं के प्राकृतिक वास अपनी मौलिकता खोते जा रहे हैं। इसका प्रभाव उसमें रहने वाले जीव जन्तुओं पर पड़ रहा है। फलस्वरूप जीवों के अनुकूल पर्यावरणीय दशाओं को पुनर्स्थापित करना नितान्त जरूरी हो गया है।

अनेक प्राकृतिक घटनायें घटित होती रहती हैं। वन्य जीव इन घटनाओं का कोपभाजन बनते हैं। फलस्वरूप अनेक जीव-जन्तु मर जाते हैं अथवा स्थानान्तरित हो जाते हैं। इन घटनाओं से वन्य जीवों की रक्षा करना मनुष्य का नैतिक दायित्व बनता है।

आखेट से 5 प्रतिशत वन्य जीवों का विनाश होता है। फलस्वरूप आखेट पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। विश्व के सभी देश पर्यावरण अधिनियम बना कर इसे कानून द्वारा प्रतिबन्धित करें, जिससे अनेक दुर्लभ प्रजाति वाले जीवों की सुरक्षा हो सके।

वन्य जीवों को सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान करना चाहिए। भारत में बाघ, हाथी, गैंडा आदि की परियोजनाओं के माध्यम से प्रजाति-वर्ग के जीवों की सुरक्षा की जा रही है।

कतिपय वन्य जीव प्रजातियाँ ऐसी हैं जो विलुप्त होने के कगार पर हैं उनके संरक्षण की विशिष्ट व्यवस्था करना आवश्यक है।

अनेक वन्य जीवों को मनुष्य द्वारा नष्ट किया जा रहा है। फलस्वरूप इनकी सुरक्षा नितान्त आवश्यक है।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के लाभ

वन्य जीवन संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करने के फलस्वरूप वन्य जीव जन्तुओं की स्थिति में सुधार हुआ तथा उनकी जनसंख्या में बढ़ोत्तरी हुई।

सन्तुलन बहुत से साधनों पर सही हुआ है, क्योंकि मानवीय क्रियाओं को कानून के अधीन सीमित कर दिया गया।

मन बहलाने वाले अर्थात् मनोरंजन करने वाले स्थानों और पर्यटक स्थान भी खोल दिये गये हैं।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के दोष

एक क्षेत्र में दो नस्लों की सुरक्षा पर अधिक बल दिया गया है।

खतरा पैदा करने वाले पौधों की तरफ कम ध्यान दिया जाता है।

किसी भी जानवर को भयानक या मानवों को मारकर खाने वाला जानवर घोषित करने पर वन्य अफसरों का पर्याप्त समय लगता है। इस समय की अवधि में उस जानवर के आतंक से घरेलू जानकर भयभीत रहते हैं और कुछ भयंकर जानवर का शिकार भी हो जाते हैं। ऐसे जानवरों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाई की प्रक्रिया बहुत लम्बी है।

परम्परागत दवाईयों के पर्दे के पीछे पौधों की नस्लों का शोषण जारी है, क्योंकि दवाई सम्बन्धी महत्त्व वाले अर्थात् औषधीय पौधों को उगाया नहीं जाता है।

वन्य जीव को सुरक्षित स्थान देने हेतु बहुत से मानवीय प्राणियों को उजड़ना पड़ा है।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय

Related Posts

भारत में सिंचाई के साधन-Irrigation in India

भारत में सिंचाई के साधनों के अंतर्गत नहरें, कुएं, नलकूप, डीजल पंपसेट, तालाब आदि आते हैं। आजकल ड्रिल और स्प्रिंकलर सिंचाई भी की जा रही है।   वर्तमान समय में…

Read more !

भारतीय मानसून और उसकी प्रकृति-Indian monsoon and its nature

भारतीय मानसून उष्ण कटिबंधीय प्रकार का मानसून है। जो भारत की जलवायु में मानसूनी विशेषताओं का निर्धारण करता है। भारतीय कृषि का अधिकतर क्षेत्र मानसूनी वर्षा पर निर्भर करता है।…

Read more !

ब्रह्मांड का स्वरूप-Nature of the universe

भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने अपनी पुस्तक “समय का संक्षिप्त इतिहास (A Brief History of time)” मे बताया है कि आज से लगभग 15 अरब वर्ष पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व…

Read more !

तारों का जीवन चक्र-life cycle of stars

किसी तारे का जीवन आकाशगंगा की तीसरी भुजा में हाइड्रोजन एवं हीलियम के बादलों के बनने से  शुरू होता हैं। इन मेघों को stellar nebula कहते हैं। आदि तारा (PROTOSTAR)…

Read more !

रेगुर मिट्टी क्या है?-What is regur soil?

काली मिट्टी को रेगुर अथवा कपासी मिट्टी आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे उष्ण कटिबंधीय चरनोजम नाम से जाना जाता है। भारत में इस…

Read more !