वसा में घुलनशील विटामिन-Fat soluble vitamins

वसा में घुलनशील अर्थात कार्बनिक विलायकों में विलेय विटामिन-A, D, E, तथा K हैं तथा जल में घुलनशील विटामिन B तथा C हैं। वसा में घुलनशील विटामिनों को वसा का “KEDA” (कीड़ा) ट्रिक से याद रखा जा सकता है।

 

विटामिन-ए (Vitamin-A)-रेटिनॉल

यह शाकाहारी भोजन में नहीं पाया जाता अर्थात पादप सीधे विटामिन -ए का निर्माण नहीं करते हैं। पादप सिर्फ कैरोटिन पिगमेंट्स का निर्माण करते हैं। जन्तु शरीर स्वयं ही इसका संश्लेषण करता है।

जन्तु शरीर में इसका संश्लेषण यकृत तथा आंत्रीय श्लेष्मा में शाकाहारी भोजन से प्राप्त कैरोटिन पिगमेंट्स से होता है। जबकि जन्तुओं से बने भोज्य उत्पाद में यह सीधे प्राप्त होता है। शरीर में विटामिन-ए की सर्वाधिक मात्रा यकृत में संचित रहती है।

विटामिन-ए के स्रोत दूध, मक्खन, अंडे की जर्दी, यकृत, मछली का तेल आदि हैं। इसका प्रमुख कार्य दृष्टि रंगाओं के संश्लेषण में भाग लेना है। इसके अतिरिक्त एपिथीलियम कोशिकाओं में प्रोटीन संश्लेषण, हड्डियों और शरीर की वृद्धि, जनन क्षमता तथा कार्बोहाइड्रेट उपापचय के लिए आवश्यक होता है।

इसकी कमी से रतौंधी हो जाती है तथा त्वचा व कोर्निया की कोशिकाएं सूखने लगती है और शल्कीभवन हो जाता है। कोर्निया के शल्कीभवन (keratinization) को जीरोफ्थैलमिया रोग कहते हैं। इस विटामिन की कमी से एपिथीलियम कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं। जिससे उन पर जीवाणुओं का संक्रमण आसानी से हो जाता है। अतः इस विटामिन को संक्रमणरोधी विटामिन भी कहते हैं।

विटामिन-डी (Vitamin-D)-कैल्सीफेरॉल

जन्तुओं में दो प्रकार के सक्रिय विटामिन-डी पाये जाते हैं-कोलीकैल्सीफेरॉल, अर्गोकैल्सीफेरॉल

कोलीकैल्सीफेरॉल-इसका संश्लेषण जन्तु स्वयं अपनी त्वचा कोशिकाओं में 7-डीहाइड्रोकोलेस्ट्रॉल नामक पदार्थ से करते हैं। यह क्रिया सूर्य प्रकाश की पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से होती है। इसलिए कोलीकैल्सीफेरॉल को “धूप का विटामिन” भी कहते हैं।

अर्गोकैल्सीफेरॉल-इसका भी संश्लेषण सूर्य प्रकाश की पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में यीस्ट कोशिकाओं में “अर्गोस्ट्रॉल” नामक पदार्थ से होता है।

विटामिन-डी के स्रोत मक्खन, यकृत, मछली का तेल, अण्डे, सूर्य का प्रकाश आदि हैं। यह फॉस्फोरस तथा कैल्सियम के अवशोषण और अस्थि निर्माण एवं दांतों के लिए आवश्यक होती है।

इसकी कमी से बच्चों में सूखा रोग (रिकेड्स) हो जाता है तथा वयस्कों में ऑस्टियोमैलेसिया हो जाता है।

विटामिन-ई (टोकोफेरॉल)

इस antisterility vitamin भी कहा जाता है। यह अंकुरित अनाजों में अधिकता में पायी जाती है। इसकी कमी से जनन क्षमता में कमी तथा कंकाल पेशियां कमजोर हो जाती है।

कार्बोहाइड्रेट्स क्या होते हैं?

विटामिन-के (नैफ्थोक्विनोन)

यह यकृत में प्रोथ्रोम्बिन नामक पदार्थ के निर्माण में भाग लेता है। यह रक्त का थक्का जमने के लिए आवश्यक होता है। इसिलए इसे रक्तस्राव रोधी पदार्थ (antihaemorrhagic factor) भी कहते हैं। यह हरी सब्जियों, टमाटर, गोभी, सोयाबीन, यकृत, पनीर आदि में प्रचुरता में पाया जाता है। आंत्र के बैक्टीरिया भी इसका संश्लेषण करते हैं।