काव्य में रस – परिभाषा, अर्थ, अवधारणा, महत्व, नवरस, रस सिद्धांत

जैसा कि आप जानते हैं कि काव्य की तीन प्रमुख अंगों में से रस भी एक अंग होता है। अतः आप यहाँ क्रमवार आप पढ़ेंगे: काव्य में रस क्या है,…

Read more !

काव्य सौन्दर्य – Kavya Saundarya ke tatva

काव्य के सौन्दर्य-तत्व मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं, जो निम्नलिखित हैं- भाव-सौन्दर्य विचार-सौन्दर्य नाद-सौन्दर्य अप्रस्तुत-योजना का सौन्दर्य भाव सौन्दर्य प्रेम, करुणा, क्रोध, हर्ष, उत्साह आदि का विभिन्न…

Read more !

बंगाल का विभाजन-Partition of Bengal

बंगाल का विभाजन 16 अक्टूबर 1905 ई. को प्रभावी हुआ। वायसराय लार्ड कर्जन ने 19 जुलाई 1905 को विभाजन की रूपरेखा आम जनता के सामने रखी। 20 जुलाई को विभाजन…

Read more !

भारत के वायसराय-Viceroy of India

1858 के अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय कहा जाने लगा। गवर्नर जनरल और वायसराय एक ही व्यक्ति होता था। जब वह ब्रिटिश प्रान्तों का शासन…

Read more !

भारत के गवर्नर जनरल-Governor General of India

लार्ड विलियम बैंटिंक (1828-35 ई.)- 1828 से 1833 तक बंगाल का गवर्नर जनरल और 1833 से 1835 तक भारत का गवर्नर जनरल। चार्ल्स मेटकॉफ (1835-36 ई.) लार्ड आकलैण्ड (1836-42 ई.)…

Read more !

बंगाल के गवर्नर जनरल-Governor General of Bengal

ब्रिटिश सरकार ने कम्पनी पर नियंत्रण स्थापित करने हेतु रेग्यूलेटिंग एक्ट-1773 पारित किया। जिसमें बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बनाने का प्रावधान किया गया। वारेन हेस्टिंग्स को…

Read more !

बंगाल के गवर्नर-Governor of Bengal

भारत में अंग्रेजी शासन की स्थापना सर्वप्रथम बंगाल में हुई। प्लासी के युद्ध के समय बंगाल में अंग्रेजों का प्रमुख ड्रेक था। प्लासी युद्ध की सफलता में राबर्ट क्लाइव की…

Read more !

भारत सरकार अधिनियम-1935-Government of India Act-1935

भारत सरकार अधिनियम-1935 ब्रिटिश संसद द्वारा अगस्त 1935 में भारत शासन हेतु पारित किया गया सर्वाधिक विस्तृत अधिनियम था। इसमें वर्मा सरकार अधिनियम-1935 भी शामिल था। भारत में संवैधानिक सुधारों…

Read more !

मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम-Montagu Chelmsford Reform Act

मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार अधिनियम तत्कालीन भारत सचिव मोंटेग्यू तथा वायसराय चेम्सफोर्ड की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर 1919 ई. में पारित किया गया था। भारत में प्रशासनिक सुधार लाने तथा…

Read more !

मार्ले मिन्टो सुधार अधिनियम-Marley Minto Reform Act

मार्ले मिन्टो सुधार अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा सर अरुण्डेल समिति की रिपोर्ट के आधार पर फरवरी 1909 में पारित किया गया था। दरअसल यह भारत परिषद अधिनियम-1909 के नाम से…

Read more !

1892 का भारतीय परिषद अधिनियम-Indian Councils Act of 1892

1892 का भारतीय परिषद अधिनियम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संवैधानिक सुधारों की मांग पर ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था। इसे अधिनियम को भारतीयों द्वारा “लार्ड क्राउन अधिनियम” नाम…

Read more !

भारत परिषद अधिनियम-1861 – Indian Council Act-1861

भारतीय परिषद् अधिनियम -1861 प्रशासन में भारतीयों को शामिल करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इस अधिनियम ने वायसराय की परिषद् की संरचना में बदलाव किया। यह प्रथम अवसर…

Read more !

महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र-Queen Victoria’s manifesto

कम्पनी से क्राउन के हाथों में सत्ता के हस्तान्तरण के बाद महारानी विक्टोरिया ने 1 नवम्बर 1858 ई. को शाही घोषणा एक घोषणा-पत्र के माध्यम से की। इस घोषणा पत्र…

Read more !

भारत सरकार अधिनियम-1858 – भारतीय प्रशासन सुधार सम्बन्धी अधिनियम – Government of India Act-1858

भारत सरकार अधिनियम-1858 को भारतीय प्रशासन सुधार सम्बन्धी अधिनियम‍ भी कहा गया है। अगस्त 1858 ई. में ब्रिटिश संसद ने एक अधिनियम पारित कर भारत में कंपनी के शासन को…

Read more !

चार्टर एक्ट-1600, 1726, 1793, 1813, 1833 और 1853 की विशेषताएं, उपबन्ध और महत्व

भारत के संवैधानिक इतिहास में चार्टर एक्ट का प्रारम्भ ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना से होता है। सन 1600 ई. के चार्टर एक्ट ईस्ट इंडिया कम्पनी को पूर्वी देशों के…

Read more !

पिट्स इंडिया एक्ट-1784-Pitt’s India Act

अगस्त 1784 ई. में पिट्स इण्डिया एक्ट पास हुआ। इसने पहले के अधिनियमों के दोषो को दूर करने का प्रयास किया। इस एक्ट कंपनी के प्रदेशों को ‘भारत में ब्रिटिश…

Read more !

रेग्यूलेटिंग एक्ट का महत्व-Importance of Regulating Act

यद्यपि रेग्यूलेटिंग एक्ट में बहुत दोष थे, फिर भी जिन परिस्थितियों में उसका निर्माण हुआ, सर्वथा सराहनीय था। बाउटन राउज के अनुसार, एक्ट का उद्देश्य तो अच्छा था, पर जो…

Read more !

रेग्यूलेटिंग एक्ट के दोष-Defects of Regulating Act

रेग्यूलेटिंग एक्ट का उद्देश्य कम्पनी के संविधान तथा उसके भारतीय प्रशासन में आवश्यक सुधार करना था अर्थात् इसका उद्देश्य उस बुराइयों को दूर करना था, जो कम्पनी के शासन में…

Read more !