भारत के वायसराय-Viceroy of India

1858 के अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय कहा जाने लगा। गवर्नर जनरल और वायसराय एक ही व्यक्ति होता था। जब वह ब्रिटिश प्रान्तों का शासन देखता था तब गवर्नर जनरल तथा जब भारतीय राजाओं के साथ ब्रिटिश सम्राट के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता था तब वायसराय कहलाता था।

भारत के वाइसराय की लिस्ट-List of Viceroys of India

01-कैनिंग (1856-62 ई.)- भारत का प्रथम वायसराय।

02-एल्गिन प्रथम (1862-63 ई.)

03-सर जॉन लारेन्स (1864-69 ई.)

04-मेयो (1869-72 ई.)

05-नार्थब्रुक (1872-76 ई.)

06-लिटन (1876-80 ई.)

07-रिपन (1880-84 ई.)

08-डफरिन (1884-88 ई.)

09-लैंस डाउन (1888-94 ई.)

10-एल्गिन द्वितीय (1894-99 ई.)

11-कर्जन (1899-1905 ई.)

12-मिण्टो द्वितीय (1905-10 ई.)

13-हार्डिंग (1910-16 ई.)

14-चेम्सफोर्ड (1916-21 ई.)

15-रीडिंग (1921-26 ई.)

16-इरविन (1926-31 ई.)

17-विलिंगटन (1931-36 ई.)

18-लिनलिथगो (1936-43 ई.)

19-वेवेल (1943-47 ई.)

20-माउन्ट बेटन (1947-जून 48 ई.)- भारत का अंतिम अंग्रेज वायसराय

21-सी. राजगोपालाचारी (1948-50 ई.)- भारत के अंतिम वायसराय और प्रथम भारतीय वायसराय भी।

भारत का प्रथम वायसराय-first viceroy of india

भारत सरकार अधिनियम-1858 द्वारा भारत का शासन कम्पनी के हाथों से छीनकर ब्रिटिश ताज के अधीन कर दिया गया तथा भारत के गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय बना दिया गया। लार्ड कैनिंग कम्पनी शासन के अधीन नियुक्त अन्तिम गवर्नर जनरल तथा ब्रिटिश ताज के अधीन नियुक्त भारत का प्रथम वाइसराय था।

 

लार्ड कैनिंग 1856 में भारत का गवर्नर जनरल नियुक्त हुआ था। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश संसद को 1858 का अधिनियम पारित करना पड़ा। जिसमें यह प्रावधान किया गया कि अब भारत का गवर्नर जनरल सम्राट के प्रतिनिधि के रूप में भारत में कार्य करेगा। अर्थात जब वह ब्रिटिश भारतीय प्रान्तों का शासन देखेगा तब ब्रिटिश ताज के अधीन गवर्नर जनरल के रूप में कार्य करेगा और जब भारतीय राजाओं से नीतियां निर्धारित करेगा तब ब्रिटिश सम्राट के प्रतिनिधि (Viceroy) के रूप में कार्य करेगा।

भारत का अन्तिम वायसराय-Last viceroy of india

लार्ड माउन्ट बेटन भारत का अंतिम अंग्रेज वाइसराय था तथा स्वतन्त्र भारत का प्रथम वाइसराय था। जबकि सी. गोपालाचारी भारत के अन्तिम वाइसराय थे तथा स्वतन्त्र भारत के दूसरे वायसराय थे। सी. गोपालाचारी भारत के प्रथम और अन्तिम भारतीय वाइसराय थे।

भारत के वायसरायों के कार्यकाल और प्रमुख कार्य और घटनाएं

लार्ड कैनिंग (lord canning 1856-62 ई.)

कैनिंग कम्पनी के शासन के अधीन नियुक्त अन्तिम गवर्नर जनरल तथा ब्रिटिश क्राउन के तहत् नियुक्त प्रथम वायसराय था।

इसके शासन काल की प्रमुख घटना 1857 का विद्रोह था। 1857 में कैनिंग भारत का गवर्नर जनरल था।

विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 की धारा XV से विधवा विवाह को कानूनी मान्यता इन्हीं के समय (26 जुलाई 1856) में प्राप्त हुई।

महालेखा परीक्षक पद का सृजन लार्ड कैनिंग के समय में 1857 में हुआ था। स्वतंत्र भारत में इस पद का नाम ‘नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक’ कर दिया गया।

मैकाले द्वारा निरूपित इंडियन पैनल कोड 1860 में पारित किया गया तथा 1 जनवरी 1861 में लागू किया गया।

1961 में लार्ड कैनिंग के समय इंडियन उच्च न्यायालय अधिनियम पारित हुआ, जिसके द्वारा कालान्तर में बम्बई, कलकत्ता तथा मद्रास में एक-एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई।

बंगाल में नील विद्रोह (1859-60ई 0) कैनिंग के कार्यक्रम में हुआ।

लार्ड कैनिंग ने सैनिकों की निःशुल्क डाक-व्यवहार सुविधा को समाप्त कर दिया।

भारत में आर्थिक सुधारों के निमित्त लार्ड कैनिंग ने ब्रिटिश अर्थशास्त्री लार्ड विल्सन को भारत बुलवाया। विल्सन ने भारत में 500 रूपये से अधिक वार्षिक आय पर आयकर रोपित किया तथा निर्यात पर 4 % और आयात 10 प्रतिशत कर निर्धारित किया।

सर जॉन लारेन्स (Sir John Lawrence 1864-69 ई.)

जॉन लारेन्स को ‘भारत का रक्षक’ कहा जाता है।

1865 में भारत और यूरोप के बीच प्रथम समुद्री टेलीग्राफ सेवा शुरू की गई।

अफगानिस्तान के संदर्भ में लारेन्स ने ‘अहस्तक्षेप’ की नीति का पालन किया जो ‘शानदार निष्क्रियता’ (Masterly Inactivity) के नाम से जाना जाता था।

लार्ड मेयो (Lord Mayo 1869-72 ई.)

1870 में केंद्रीय एवं प्रांतीय वित्त व्यवस्था के पृथक्करण (Economic de – Centralization) की दिशा में पहला कदम उठाया गया।

भारतीय सांख्यकीय सर्वेक्षण का गठन किया गया।

1872 ई. में कृषि विभाग एवं वाणिज्य विभाग का गठन किया।

राज्य रेल प्रणाली की शुरूआत की गयी।

भारतीय राजकुमारों की शिक्षा एवं राजनीतिक प्रशिक्षण के लिए 1872 ई. में दो महाविद्यालियों -काठियावाड़ में राजकोट महाविद्यालय की एवं अजमेर में मेयों महाविद्यालय की स्थापना की गयी। इलाहाबाद में मेयो सेन्ट्रल कालेज की स्थापना भी इसी समय हुई थी।

1872 ई. में भारत में प्रथम जनगणना कराने का श्रेय लार्ड मेयो को ही प्राप्त है।

लार्ड लिटन

ये अच्छा साहित्यकार एवं कवि था जो अपनी कविताएं ओवेन मेरिडिथ नाम से लिखता था।

इसने भारतीय राजाओं से नमक बनाने का अधिकार छीनकर केन्द्र सरकार के हवाले करके नमक कर बढ़ा दिया। लिटन ने आयात कर ( 29 वस्तुओं से ) पूर्णतः समाप्त कर दिया किन्तु निर्यात कर अभी भी जारी था।

रॉयल टाइटल अधिनियम 1876 ई. इसी के काल में पारित किया गया जिसके द्वारा महारानी विक्टोरिया को कैसर-ए-हिन्द की उपाधि को 1 जनवरी 1877 को प्रथम दिल्ली दरबार के आयोजन के दौरान प्रदान किया गया।

1878 में भारतीय समाचार पत्र अधिनियम अर्थात् ‘वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट’ लिटन के कार्यकाल में ही पारित किया गया। जिसके तहत् भारतीय समाचार पत्रों विशेषकर राष्ट्रवादी (सोम प्रकाश) समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगा दिया।

1878 में ही आर्म्स एक्ट पारित किया गया । इसके तहत् भारतीयों के हथियार रखने के अधिकार को छीन लिया गया।

सिविल सेवा परीक्षा में प्रवेश हेतु आयु 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दी गयी।

लार्ड रिपन (Lord Ripon 1880-84 ई.)

1881 ई. में प्रथम कारखाना अधिनियम पारित हुआ, जिसमें 7 से 12 वर्ष आयु के बच्चों के कार्य करने के 9 घंटे निर्धारित किए गए।

1882 में लिटन के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट को रद्द करते हुए रिपन ने समाचार पत्रों की स्वतंत्रता बहाल कर दी।

लार्ड रिपन द्वारा 1882 ई ० में स्थानीय स्वशासन की भारत में शुरूआत की गई। यह स्वशासन तीन इकाईयों- तालुका बोर्ड (ग्रामीण क्षेत्र), म्यूनिसिपल बोर्ड एवं जिला बोर्ड में विभक्त किया गया था।

लार्ड रिपन ने 1881 ई. में भारत की सर्वप्रथम नियमित जनगणना करवायी। तब से लेकर आज तक प्रत्येक 10 वर्ष के अन्तराल पर जनगणना करवायी जाती है। भारत में पहली जनगणना सन् 1872 ई. में मेयो के कार्यकाल में हुई थी ।

सर विलियम हंटर की अध्यक्षता में 1882 में शिक्षा आयोग की नियुक्ति की गई, जिसका उद्देश्य वुड डिस्पैच (1854) के शिक्षा सुधारों का मूल्यांकन करना था।

फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने रिपन को भारत का उद्धारक की उपमा दी।

रिपन ने सिविल सेवा में प्रवेश की आयु को पुनः 19 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया।

लॉर्ड डफरिन (Lord Dufferin 1884-1888 ई.)

इसके समय तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध (1885-88 ई.) हुआ और बर्मा को अन्तिम रूप से अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया।

इसी समय बंगाल टेनेन्सी एक्ट, अवध टेनेन्सी एक्ट तथा पंजाब टेनेन्सी एक्ट पारित हुआ।

इसके समय की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी- 28 दिसम्बर, 1885 ई. को बम्बई में ए. ओ. ह्यूम के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना।

लॉर्ड लैन्सडाऊन

भारत और अफगानिस्तान के मध्य सीमा रेखा (डूरण्ड रेखा) का निर्धारण इसी समय हुआ। 1891 ई. में दूसरा कारखाना अधिनियम लाया गया, जिसमें स्त्रियों को 11 घंटे प्रतिदिन से अधिक काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया। साथ ही सप्ताह में एक दिन छुट्टी की व्यवस्था की गयी।

लॉर्ड एल्गिन द्वितीय

“भारत को तलवार के बल पर विजित किया गया है और तलवार के बल पर ही इसकी रक्षा की जाएगी” यह कथन- लॉर्ड एल्गिन द्वितीय का है।

1895-1898 ई. के मध्य, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब एवं मध्य प्रदेश में भयंकर अकाल पड़ा।

लॉर्ड कर्जन (1899-1905 ई.)

1899 में कर्जन ने भारतीय टंकण और पत्र-मुद्रा अधिनियम पारित कराकर अंग्रेजी स्वर्ण मुद्रा को भारत की कानूनी मुद्रा घोषित कर दिया। शासन की कार्यक्षमता के आधार पर लॉर्ड कर्जन ने स्थानीय स्वशासन की प्रणाली पर आघात किया और 1899 में कलकत्ता कॉरपोरेशन अधिनियम बनाया।

कर्जन ने सन् 1901 ई. में सर कॉलिन स्कॉट मॉनक्रीफ की अध्यक्षता में एक सिंचाई आयोग, टॉमस रॉबर्टसन की अध्यक्षता में एक रेलवे आयोग 1902 ई. में सर एण्ड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में एक पुलिस आयोग एवं सर टामस रैले की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना की।

1904 ई. में भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पास किया गया।

कर्जन ने सर एण्टनी मैकडॉनल की अध्यक्षता में एक अकाल आयोग का गठन किया।

प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम 1904 ई. के द्वारा कर्जन ने भारत में पहली बार ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा एवं मरम्मत की ओर ध्यान दिया। इस कार्य के लिए कर्जन ने भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की।

कर्जन के समय 1904 में सहकारी उधार समिति अधिनियम बनाया गया जिसके द्वारा सहकारी समितियों की स्थापना करके किसानों को उचित ब्याज पर रुपया कर्ज देने की व्यवस्था की गयी।

इसके समय 1905 में पूसा में एक कृषि अनुसंधान संस्था खोली गयी।

कर्जन के समय में ही पहली बार प्रत्येक प्रांत और केन्द्र स्तर पर एक निदेशक के अधीन एक पृथक गुप्तचर विभाग की स्थापना की गयी। लॉर्ड कर्जन के समय में किचनर परीक्षा को सैनिक प्रशिक्षण में शामिल करके सेना की युद्ध-क्षमता को बढ़ाया गया।

इसी के कार्यकाल के दौरान कलकत्ता में विक्टोरिया मेमोरियल हॉल का निर्माण हुआ।

कर्जन के भारत विरोधी कार्यों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य था 1905 ई. में बंगाल का विभाजन। 19 जुलाई  1905 ई. को बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा शिमला में की गयी और इसका प्रारूप प्रकाशित किया गया। सितम्बर 1905 में उसे सम्राट ने भी स्वीकृति दे दी। 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन की योजना को लागू किया गया।

लॉर्ड मिन्टो द्वितीय (1905-1910 ई.)

इसके समय में आगा खाँ एवं सलीम उल्ला खाँ के द्वारा ढाका में 1906 ई. में मुस्लिम लीग की स्थापना की गयी।

1907 ई. के काँग्रेस के सूरत अधिवेशन में काँग्रेस का विभाजन हो गया।

इसके शासनकाल में 1907 ई. में आँग्ल एवं रूसी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठक हुई।

मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था मार्ले-मिन्टो सुधार अधिनियम -1909 ई ० के द्वारा किया गया।

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय

इसके समय में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम भारत आए। 12 दिसम्बर 1911 ई. में दिल्ली में एक भव्य दरबार का आयोजन हुआ। यहाँ पर बंगाल-विभाजन को रद्द करने की घोषणा की गयी एवं भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानान्तरित करने की घोषणा की गयी। 1912 ई. में दिल्ली भारत की राजधानी बनी।

23 दिसम्बर 1912 ई. को लॉर्ड हार्डिंग पर दिल्ली में बम फेंका गया। इस कांड में भाई बालमुकुन्द को फाँसी की सजा दी गई।

1916 ई. में लॉर्ड हार्डिंग को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया।

लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-1921 ई.)

काँग्रेस के लखनऊ अधिवेशन (1916 ई.) में काँग्रेस का एकीकरण हुआ एवं मुस्लिम लीग के साथ समझौता हुआ।

1916 ई. में पूना में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।

इसके काल में 1917 ई. में शिक्षा पर सैडलर आयोग का गठन किया गया।

इसी के काल में 1919 ई. में रौलेट एक्ट पारित हुआ।

इसी के काल में 13 अप्रैल 1919 ई. को जालियाँवाला बाग (अमृतसर) हत्याकांड हुआ।

खिलाफत आन्दोलन एवं गाँधीजी का असहयोग आन्दोलन इसी के समय प्रारंभ हुआ।

लार्ड रीडिंग (1921-1926 ई.)

5 फरवरी 1922 ई. को घटी चौरी – चौरा काण्ड के बाद महात्मा गाँधी ने अपना असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया।

1923 ई. में चित्तरंजन दास एवं मोतीलाल नेहरू ने इलाहाबाद में काँग्रेस के अंतर्गत स्वराज्य पार्टी की स्थापना की। 1923 ई. के चुनाव में इस दल को मध्य प्रांत एवं बंगाल में पूर्ण बहुमत मिला।

इसके काल में ही प्रिंस ऑफ वेल्स ने नवम्बर , 1921 ई . में भारत की यात्रा की। इस दिन पूरे भारत में हड़ताल का आयोजन किया गया।

लार्ड इरविन (1926-1931 ई.)

3 फरवरी 1928 ई. साइमन कमीशन बम्बई पहुँचा।

लाला लाजपत राय की मृत्यु के बदले में भारतीय चरमपंथियों द्वारा दिल्ली के असेम्बली हॉल में 1929 ई. में बम फेंका गया।

इसी के समय में लाहौर जेल में जतिनदास ने 13 जुलाई  1929 ई. को भूख हड़ताल शुरू की और भूख हड़ताल के 64 वें दिन 13 सितम्बर 1929 ई. को उनकी मृत्यु हो गई।

1929 ई. में काँग्रेस के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ का लक्ष्य निर्धारित किया गया और 26 जनवरी 1930 ई. को स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की गयी।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान-महात्मा गाँधी को 5 मई 1930 ई . को गिरफ्तार कर लिया गया। 25 जनवरी 1931 ई. को वायसराय इरविन बिना कोई शर्त के उन्हें रिहा कर दिया।

12 नवम्बर 1930 ई. में लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में काँग्रेस ने भाग नहीं लिया। 4 मार्च 1931 ई. को गाँधी-इरविन समझौते पर हस्ताक्षर किया गया और साथ ही ‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ को स्थगित किया गया।

लॉर्ड वेलिंगटन (1931-1936 ई.)

इसके समय में लंदन में 7 सितम्बर से 1 दिसम्बर , 1931 ई. तक द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में काँग्रेस ने भी भाग लिया। काँग्रेस का प्रतिनिधित्व महात्मा गाँधी ने किया। दूसरे गोलमेज सम्मेलन की असफलता के बाद महात्मा गाँधी ने 3 जनवरी 1932 ई. को दुबारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारंभ किया।

16 अगस्त 1932 ई. में रैम्जे मैकडोनाल्ड ने विवादास्पद ‘साम्प्रदायिक पंचाट’ की घोषणा की। इसके अनुसार दलितों को हिन्दुओं से अलग मानकर उन्हें अलग प्रतिनिधित्व देने को कहा गया और दलित वर्गों के लिए अलग निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया।

लॉर्ड लिनलिथगो (1936-1943 ई.)

इसके समय में पहली बार चुनाव कराए गए। काँग्रेस ने ग्यारह में से आठ प्रान्तों में अपनी सरकारें बनाईं।

1 सितम्बर 1939 ई. को द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ। ब्रिटिश सरकार ने बिना भारतीयों से पूछे भारत को भी युद्ध में झोंक दिया। काँग्रेस ने इसका विरोध करते हुए नारा दिया ‘न कोई भाई, न कोई पाईं’।

1 मई 1939 ई . में सुभाष चन्द्र बोस ने फारवर्ड ब्लॉक नाम की एक नयी पार्टी बनाई।

मार्च 1940 ई. में लीग के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पाकिस्तान की माँग की गयी।

8 अगस्त 1940 ई. को अगस्त प्रस्ताव अंग्रेजों के द्वारा लाया गया। मार्च 1942 ई. में क्रिप्स मिशन भारत आया। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने क्रिप्स प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया।

लॉर्ड वेवेल ( 1944-1947 ई. )

वायसराय वेवेल ने 25 जून 1945 ई. को शिमला में एक सम्मेलन बुलाया। इस सम्मेलन में कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व अबुल कलाम आजाद ने किया था। गाँधी जी ने सम्मेलन में भाग नहीं लिया, यद्यपि वे शिमला में उपस्थित रहे। सम्मेलन के दौरान मुस्लिम लीग द्वारा यह शर्त रखी गई कि वायसराय की कार्यकारिणी परिषद् में नियुक्त होने वाले सभी मुस्लिम सदस्यों का चयन वह स्वयं करेगी। मुस्लिम लीग का यह अड़ियल रूख 14 जुलाई तक बना रहा अतः वेवेल 14 जुलाई , 1945 ई . को सम्मेलन के विफलता की घोषणा की।

लॉर्ड माउण्टबेटन (मार्च 1947 से जून 1948 ई.)

सत्ता हस्तांतरण के लिए 24 मार्च 1947 ई. को भारत का वायसराय लार्ड माउण्ट बेटन को बनाया गया। 3 जून 1947 ई. को माउण्ट बेटन योजना घोषित हुई, इसमें भारत विभाजन शामिल था। 4 जुलाई, 1947 ई. को ब्रिटिश संसद में एटली द्वारा भारतीय स्वतंत्रता विधेयक प्रस्तुत किया गया , जिसे 18 जुलाई 1947 को स्वीकृति मिली। विधेयक के अनुसार भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्रों की घोषणा की गयी। 15 अगस्त 1947 ई. को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर-जेनरल लॉर्ड माउण्टबेटन हुए।

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