रेगुर मिट्टी क्या है?-What is regur soil?

काली मिट्टी को रेगुर अथवा कपासी मिट्टी आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे उष्ण कटिबंधीय चरनोजम नाम से जाना जाता है।

भारत में इस मिट्टी का विस्तार लगभग 5.46 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र पर है। जो देश लगभग 16.6% भू-भाग है। यह भारतीय मृदा का तृतीय विशालतम वर्ग है।

भारत में काली मिट्टियों का निर्माण बेसाल्ट लावा के अपक्षय एवं अपरदन के कारण हुआ है। इसके निर्माण में चट्टानों की प्रकृति के साथ-साथ जलवायु की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

भारत में काली मिट्टी उपलब्धता दक्कन ट्रेप के ऊपरी भागों विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक आदि में पायी जाती है।

 

काली मिट्टी कपास की खेती के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है। इसमें लोहा, चुना, कैल्शियम, पोटास, एल्युमिनियम एवं मैग्नीशियम कार्बोनेट का अधिकता होती है किन्तु नाइट्रोजन, फास्फोरस व जैविक पदार्थों की कमी होती है।

काली मिट्टी में जल धारण करने की क्षमता सर्वाधिक होती है। यह भीगने पर चिपचिपी व ठोस हो जाती है तथा सूखने पर इसमें गहरी दरारे पड़ जाती है। इसीलिए इसे स्वतः जुताई वाली मिट्टी कहा जाता है।

शुष्क कृषि के लिए यह सबसे उपयुक्त मिट्टी मानी जाती है। ऊंचाई के भागों की तुलना में निचले क्षेत्रों में ये मिट्टियाँ अधिक उपजाऊ होती है। इनमें कपास, मोटे अनाज, तिलहन, सूर्यमुखी, अंडी, सब्जियां, खट्टे फल आदि की कृषि होती है।

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क्रेब्स के अनुसार रेगुर मृदा एक परिपक्व मृदा है जिसके निर्माण में विशिष्ट उच्चावच और जलवायु की प्रमुख भूमिका है।

काली मिट्टी के प्रकार

प्रायद्वीपीय काली मृदा को सामान्यतः तीन भागों में बांटा जा सकता है।

छिछली काली मृदा- इसका निर्माण दक्षिण में बेसाल्ट लावा से हुआ है। यह मिट्टी सामान्य दोमट से लेकर चिकनी व गहरे रंगों की होती है।

मध्यम काली मृदा- यह काले रंग की मिट्टियाँ हैं। इसका निर्माण बेसाल्ट, शिस्ट, ग्रेनाइड, नीस आदि चट्टानों की टूट-फूट से हुआ है।

गहरी काली मृदा- यही वास्तविक काली मिट्टी है। इसका निर्माण ज्वालामुखी के उदगार से हुआ है।

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Important question

Question. भारत में रेगुर मिट्टी सर्वाधिक कहाँ पायी जाती है?

Answer. भारत में काली मिट्टी का विस्तार महाराष्ट्र (सर्वाधिक में), पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक व तमिलनाडु आदि क्षेत्रों में पाया जाता है।

Question. भारत की मिट्टियों में से कपास की खेती के लिए कौन सी सर्वाधिक उपयुक्त होती है?

Answer. काली मृदा कपास की खेती सर्वाधिक उपयुक्त होती है।